जितनी बड़ी समस्या, करो उतनी बड़ी तपस्या- मुनि सुव्रतसागर महाराज

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श्रीमज्जिजिनेन्द्र पंचकल्याणक महा महोत्सव के तीसरे दिन जन्म कल्याणक के हुए संस्कार

अयोध्या नगरी से पाण्डुकशिला के लिए बालक आदिकुमार को लेकर सौधर्म इंद्र का निकला जुलूस, जन्माभिषेक में उमड़े श्रद्धालु

गुरुवार को 400 तीर्थंकर भगवंतों को होगा वैराग्य, होंगे दीक्षा कल्याणक

तालबेहट (ललितपुर) बुंदेलखंड के प्रसिद्ध दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र पावागिरि में बुधवार को सुबह मूलनायक भगवान चमत्कारी बाबा पारसनाथ स्वामी का मस्तिकाभिषेक किया गया। परम पूज्य आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज एवं नवाचार समयसागर महाराज के मंगलमय आशीर्वाद से आयोजित श्रीमज्जिजिनेन्द्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा विश्व शांति महायज्ञ एवं नव गजरथ महा महोत्सव के तीसरे दिन वात्सल्य मूर्ति बुंदेली संत मुनि सुव्रतसागर महाराज के पावन सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैया मुरैना, सह प्रतिष्ठाचार्य अमित जैन शास्त्री इंदौर के दिशा निर्देशन में अयोध्या नगरी में अभिषेक शांतिधारा, पूजन-विधान के बाद बालक आदि कुमार का जन्म हुआ, जन्मातिशय देखकर सभी मन्त्रमुग्ध हो गये। महाराज नाभिराय के दरबार में बधाइयाँ, सौधर्म इंद्र द्वारा नगर प्रदक्षिणा, इन्द्राणी द्वारा बालक आदिकुमार को प्रसूति ग्रह से बाहर लाना और इंद्र को सौंपने का सुन्दर प्रस्तुति करण किया गया। मुनि श्री का पाद पृच्छालन कर शास्त्र भेंट दिनेश कुमार मोहित जैन बीना ने किया। बुंदेली संत मुनि सुव्रतसागर महाराज ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा जितनी बड़ी समस्या, करो उतनी बड़ी तपस्या। पाप कर्म के उदय में हमें अधिक पुण्य का संचय करना चाहिए। यह पांचवां मौका है जब इस पावन भूमि पर पंचकल्याणक का कार्यक्रम हो रहा है। जब भगवान का जन्म होता है तो तीनो लोक में खुशियाँ छा जाती हैं, नरक में भी उस क्षण कोई कष्ट-दुःख नहीं होता। धर्म की प्रभावना के लिए भी संतान की आवश्यकता होती है। धर्म समाज और देश का संचालन एक संतान से नहीं हो सकता, बस एक भावना होना चाहिए कि संतान रावण नहीं राम हो। कुटुंब के पुण्य से संस्कारी बालक, देश के पुण्य से संत और तीनों लोक के पुण्य से तीर्थंकर भगवान का जन्म होता है। जन्म से भगवान पसीना रहित, मल-मूत्र रहित, उत्तम संहनन युक्त, सुगन्धित शरीर, श्वेत रुधिर, अनंत बल, मधुर वाणी, सुन्दर रूप, 1008 चिह्न से युक्त होते हैं। मुनि श्री ने कहा संदेह मत करना जब माँ की ममता और एक बच्चे के वात्सल्य से सफ़ेद दूध आ जाता है तो जब भगवान का वात्सल्य और प्रेम तो तीन लोक से होता है तो सफ़ेद रक्त होना कौन सी बड़ी बात है। दोपहर की बेला में अयोध्या नगरी से सुमेरु पर्वत पाण्डुकशिला के लिए बालक आदिकुमार को लेकर सौधर्म इंद्र का ऐरावत हाथी पर जुलूस निकला, जिसमें सबसे आगे डीजे की धार्मिक धुनों पर नृत्य करती 24 अष्टकुमारी एवं महिलाएं, बग्गी में सवार 24 सौधर्म इंद्र एवं विधिनायक इंद्र साक्षी दीपक सिंघई हाथी पर सवार राजा नाभिराय डॉ. जयकुमार जैन सौधर्म इंद्र उत्तमचंद्र जैन, कुबेर इंद्र विजय जैन बामौर चल रहे थे। शोभा यात्रा अयोध्या नगरी से पाण्डुकशिला पहुंची। जहाँ विधि विधान के साथ पाण्डुकशिला पर जन्माभिषेक, शचि इंद्राणी द्वारा बालक का श्रृंगाऱ, इंद्र द्वारा बालक माता को सौंपने की क्रियाएँ की गयी, जिसमें भारी श्रद्धालु उमड़े। सायं काल महाआरती आशीष कुमार अचिन जैन विरधा परिवार ने की। रात्रि में सौधर्मेंद्र का तांडव नृत्य, बालक आदि कुमार का पालना एवं बाल क्रीड़ा का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बा. ब्र. अंशु भैया कोलारस, पारस भैया, पं. विजय कृष्ण शास्त्री, पं. विनोद कुमार शास्त्री, अभय कुमार, शिखरचंद्र, राजकुमार जैन, अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन बबीना, मंत्री जयकुमार जैन कन्धारी, कोषाध्यक्ष उत्तमचंद जैन बबीना, उपाध्यक्ष विशाल जैन पवा, उपमंत्री आकाश चौधरी, ऑडिटर पंकज भंडारी, अजय जैन, प्रीतेश पवैया, सीमा जैन, शिप्रा जैन, देवेंद्र कुमार, धर्णेन्द्र जैन, अनंत कुमार, प्रवीण जैन, आशीष कुमार, अरविन्द जैन, ईलू,, गौरव विरधा, शाश्वत जैन, सौरभ जैन, शुभम मोदी, अक्षत पवा सहित क्षेत्र प्रबंध कार्यकारिणी समिति, निकटवर्ती एवं देश के कोने – कोने से पधारे सकल दिगम्बर जैन समाज का सक्रिय सहयोग रहा। महामंत्री जयकुमार जैन कन्धारी ने बताया पंचकल्याणक कार्यक्रम के चौथे दिन 15 जनवरी को सुबह मूलनायक भगवान का अभिषेक शातिधारा के बाद तप कल्याणक की क्रियाएँ होंगी जिसमें महाराजा नाभिराय का दरबार, आदि कुमार का राज्याभिषेक, राज तिलक, राजव्यवस्था, 32 मुकुट बद्ध राजाओं द्वारा भेंट समर्पण, ब्राह्मी सुंदरी को अक्षर और अंक का ज्ञान, असि मसि क़ृषि आदि हेतु षटकर्म उपदेश, नीलांजना नृत्य से वैराग्य उत्पत्ति, लौकान्तिक देवों का आगमन एवं स्तवन दीक्षा, एवं दीक्षा संस्कार विशेष दर्शनीय होगे। संचालन अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन बबीना एवं आभार व्यक्त उपाध्यक्ष विशाल जैन पवा ने किया।

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