अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब, नम आंखों से सैकड़ों लोगों ने दी भावभीनी विदाई
ललितपुर। श्री वर्णी जैन इंटर कॉलेज ललितपुर के पूर्व प्राचार्य एवं एनसीसी के कैप्टन रहे अशोक कुमार श्रीवास्तव का आज चंडी माता मंदिर के पीछे स्थित श्मशान घाट पर पूरे सम्मान एवं गमगीन माहौल के बीच अंतिम संस्कार किया गया। उनके पार्थिव शरीर के पंचतत्त्व में विलीन होते ही उपस्थित सैकड़ों लोगों की आंखें नम हो गईं। शिक्षा, सामाजिक सरोकारों और युवाओं के मार्गदर्शन के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करते हुए लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
81 वर्षीय अशोक कुमार श्रीवास्तव का कल शाम हृदयाघात के कारण आकस्मिक निधन हो गया था। उनके निधन की खबर से ललितपुर के शैक्षणिक, सामाजिक एवं नागरिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनके अंतिम दर्शन एवं अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में उनके पूर्व छात्र, शिक्षक, मित्र, अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता एवं नगर के गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
अशोक कुमार श्रीवास्तव ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा एवं राष्ट्र निर्माण के कार्य को समर्पित किया। वर्ष 1970 के दशक में उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में प्रवेश किया और श्री वर्णी जैन इंटर कॉलेज में प्रवक्ता के रूप में अपनी सेवाएं प्रारंभ कीं। वे अंग्रेजी विषय के कुशल एवं लोकप्रिय प्रवक्ता रहे। अपने सहज व्यवहार, विषय पर मजबूत पकड़ और विद्यार्थियों के प्रति आत्मीयता के कारण वे छात्र-छात्राओं के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय थे।
शिक्षण कार्य के साथ-साथ उन्होंने राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) को भी अपने जीवन का महत्वपूर्ण मिशन बनाया। श्री वर्णी जैन इंटर कॉलेज में एनसीसी को निरंतर संचालित एवं मजबूत बनाने में उनका विशेष योगदान रहा। वे एनसीसी के कैप्टन के रूप में विद्यार्थियों में अनुशासन, राष्ट्रप्रेम, नेतृत्व क्षमता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए निरंतर कार्य करते रहे।
ललितपुर में एनसीसी के विस्तार की दिशा में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। नेहरू महाविद्यालय में एनसीसी प्रारंभ कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने हजारों छात्र-छात्राओं को न केवल शिक्षा प्रदान की, बल्कि उन्हें अनुशासन, संस्कार, राष्ट्रसेवा और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दी। अंग्रेजी शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्य को आज भी उनके विद्यार्थियों और सहकर्मियों द्वारा सम्मान के साथ याद किया जाता है।
उनके निधन को शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए उपस्थित लोगों ने कहा कि अशोक कुमार श्रीवास्तव जैसे शिक्षक केवल कक्षा में शिक्षा देने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे अपने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व एवं भविष्य का निर्माण करते हैं। उन्होंने अपने दीर्घ शैक्षणिक जीवन में अनेक पीढ़ियों को प्रभावित किया और हजारों विद्यार्थियों के जीवन में ज्ञान एवं अनुशासन का प्रकाश पहुंचाया।
आज उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। चंडी माता मंदिर के पीछे स्थित श्मशान घाट पर वैदिक रीति-रिवाज एवं पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान वातावरण अत्यंत भावुक रहा और उपस्थित लोगों ने नम आंखों से अपने प्रिय शिक्षक, मार्गदर्शक और मित्र को अंतिम विदाई दी।
अंतिम संस्कार में उनके परम मित्र प्रकाश चंद्र जैन एडवोकेट, अशोक कुमार रिछारिया एडवोकेट, सुशील सिन्हा, सत्यनारायण तिवारी एडवोकेट, स्वामी अनुराग अमर, लक्ष्मीनारायण विश्वकर्मा, हरीश कपूर टीटू (बुंदेलखंड सेना प्रमुख), रामेश्वर तिवारी, पंकज जैन (पूर्व पार्षद), राजीव श्रीवास्तव, राकेश श्रीवास्तव अरुण श्रीवास्तव, अनिल श्रीवास्तव, संजय श्रीवास्तव, विजय श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव, मोहित, मयंक अमित श्रीवास्तव, सहित समाज के विभिन्न वर्गों के गणमान्य नागरिक, शिक्षक, पूर्व छात्र एवं बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे।
अशोक कुमार श्रीवास्तव का भौतिक शरीर भले ही पंचतत्त्व में विलीन हो गया, लेकिन एक शिक्षक, एनसीसी कैप्टन, मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत के रूप में उनके द्वारा तैयार की गई पीढ़ियां तथा शिक्षा एवं अनुशासन के क्षेत्र में उनके योगदान की स्मृतियां सदैव जीवित रहेंगी।



